लोकगीत माला में आपका स्वागत है

लोकगीत लोक के गीत हैं। जिन्हें कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा लोक समाज अपनाता है।
लोक द्वारा लोक के लिए रचित और लोक में प्रचलित गीत ही लोकगीत है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कथनानुसार लोकगीतों में धरती, पर्वत, नदियां और फसलें गाते हैं। उत्सव, मेले और अन्य अवसरों पर मधुर कंठों में लोक समूह लोकगीत गाते हैं।

आधुनिकीकरण के इस दौर में हमारी संस्कृति विलुप्त होती दिखाई पड़ती है, ऐसे समय में इस परंपरा का अनुरक्षण आवश्यक है।हमारी पुरानी पीढ़ी के कुछ लोगो ने ये लोकगीत अपने संग्रहण में संजो कर रखे है, जिन्हें समाज के और लोगो तक पहुँचाने से इस परंपरा को सहेजा जा सकता है।

लोकगीत माला भारत के विभिन्न क्षेत्रों में गाये जाने वाले पारंपरिक लोक गीतों का अनूठा संग्रह है।
इस नए डिजिटल युग के साथ, हमने यह पहल की है ताकि लोकगीतों का यह संकलन सभी को उपलब्ध हो सके और सभी इन गीतों का आनंद उठा सके।

 

लोकप्रिय गीत

बन्ना-बन्नी  सावन का महीना

सावन का महीना बन्ने ने कीया शोर
जल्दी शादी कर दो मंहगाई का है जोर

मायरा/मामेरा  जुगल जोड़ लागे सुहावनी

लाल-लाल पाग म्हारा वीरा ने सोहे
पंचा में सोहे म्हारो वीर, वीर म्हारो लागे सुहावणो

खयाली गीत कोठे ऊपर कोठरी मैं उसमें रेल चला दूंगी

कोठे ऊपर कोठरी मैं उसमें रेल चला दूंगी

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