अक्षय पुण्य कमा ले देकर, मुनिवर को आहार | Akshay punya kama le dekar munivar ko aahaar

तर्ज:

आया पुण्य योग से अवसर, आये गुरुवर तेरे द्वार – २
अक्षय पुण्य कमा ले देकर, मुनिवर को आहार – २
तू अक्षय पुण्य कमा ले देकर, मुनिवर को आहार – २

– १ –

गिरिवर माने हार देखकर, गुरुवर की ऊंचाई – २
जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव
ज्ञान के सागर के आगे, क्या सागर की गहराई – २
मन में जिन रूप संजोये – २, करे वन वन मुनि विहार
अक्षय पुण्य कमा ले देकर…

– २ –

नवधा भक्ति लिए ह्रदय में, तुम आहार कराना – २
जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव
श्रावक धर्म को ध्यान में रखना, कहीं भूल न जाना
मुनिवर के रूप में जिनवर – २, करते है भोग स्वीकार
अक्षय पुण्य कमा ले देकर…

– ३ –

कर पड़गाहन उच्चासन धर, करो पाद प्रक्षालन – २
जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव
पूजा और प्रणाम करो, कर शुद्ध वचन का यामन
रख ध्यान के जल और भोजन – २, ये शुद्ध हो सभी प्रकार
अक्षय पुण्य कमा ले देकर…

– ४ –

पुण्यमयी वे जीव है जो, मुनि को आहार कराते – २
जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव
मुनिवर से वर पाकर, श्रावक भवसागर तर जाते – २
कहे निखिल गुरु की सेवा – २ , खोले मुक्ति का द्वार
अक्षय पुण्य कमा ले देकर…

आया पुण्य योग से अवसर, आये गुरुवर तेरे द्वार – २
अक्षय पुण्य कमा ले देकर, मुनिवर को आहार – २
तू अक्षय पुण्य कमा ले देकर, मुनिवर को आहार – २

इस पेज को शेयर करे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *