गोर-गोर गोमती | Gor gor goumati

तर्ज:

गोर-गोर गोमती, ईसर पूजूँ पार्वती।
गोर-गोर गोमती, ईसर पूजूँ पार्वती।

पार्वती के आला-गीला, गोर का सोना का टीका।
टीका दे, टमका दे राजा राणी बरत करे।

करता-करता आस आयो, मास आयो, छठे चौमासे आयो।
खेरे खाण्डे लाडू आयो, लाडू ले बीरा ने दियो।

बीरो ले गटकाय ग्यो, चूँदडी ओढाय ग्यो।
चूँदड म्हारी इब छल, बीरो म्हारो अम्मर।

राण्याँ पूजे राज मेँ, म्हेँ म्हाँका सवाग मेँ।
राण्याँ ने राज-पाट द्यो, म्हाँने अमर सवाग द्यो।

राण्याँ को राज-पाट तपतो जाय।
म्हारो सरब सवाग बढतो जाय।

ओल-जोल गेहूँ साठ, गौर बसे फूलाँ कै बास।
म्हेँ बसाँ बाण्याँ कै बास कीडी-कीडी कोडूल्यो।

कीडी थारी जात है, जात है गुजरात है।
साडी मेँ सिँघाडा, बाडी मेँ बिजौरा।

ईसर-गोरजा, दोन्यूँ जोडा, जोड्या जिमाया।
जोड जँवारा गेहूँ, क्यारा गणमण सोला।

गणमण बीस, आ ए गौर कराँ पच्चीस।
गोर-गोर गोमती, ईसर पूजूँ पार्वती।

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