जैन धर्म के हीरे मोती | Jain dharam ke heere moti

तर्ज: नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे ढूंढू रे सवारियां...

जैन धर्म के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली – 2
ले लो रे कोई प्रभु का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥

– 1 –

दौलत के दीवानों सुन लो एक दिन ऐसा आएगा, एक दिन ऐसा आएगा
धन योवन और माल खजाना यही धरा रह जाएगा, यही धरा रह जाएगा।
सुन्दर काया माटी होगी, चर्चा होगी गली गली,
जैन धर्म के हीरे मोती …

– 2 –

क्यूँ करता है तेरी मेरी तज दे अभिमान को, तज दे तू अभिमान को
झूठे झगडे छोड़ के सारे भज ले तू भगवान् को, भज ले तू भगवान् को।
जगत का मेला दो दिन का है, आखिर होगी चला चली
जैन धर्म के हीरे मोती …

– 3 –

जिस जिस ने यह मोती लुटे वो तो मला माला हुए, वो तो मला माला हुए
दौलत के जो बने पुजारी आखिर वो कंगाल हुए ,आखिर वो कंगाल हुए ।
सोने चांदी वालो सुन लो, बात कहूँ मैं भली भली,
जैन धर्म के हीरे मोती …

– 4 –

जीवन में दुःख है तब तक ही जब तक सम्यक ज्ञान नहीं, जब तक सम्यक ज्ञान नहीं
ईश्वर को जो भूल गया है वो सच्चा इंसान नही, वो सच्चा इंसान नही ।
दो दिन का यह चमन खिला है, फिर मुरझाये कली कली
जैन धर्म के हीरे मोती …

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