कर लो जिनवर का गुणगान | Kar lo jinwar ka gun-gaan

तर्ज:

कर लो जिनवर का गुणगान, आयी शुभ ये घड़ी – २
आयी शुभ घडी, देखो मंगल घडी – २
कर लो जिनवर…

– १ –

वीतराग का दर्शन पूजन, भव भव को सुखकारी – २
जिन प्रतिमा की प्यारी छवि लख, मैं जाऊ बलिहारी।
हो कर लो जिनवर…

– २ –

तीर्थंकर सर्वग्य हितंकर, महा मोक्ष के दाता – २
जो भी शरण आपकी आता, तुम सम ही बन जाता।
हो कर लो जिनवर…

– ३ –

तुम दर्शन से आर्त रौद्र, परिणाम नाश हो जाते – २
धर्म ध्यान में मनन लगता है, शुक्ल ध्यान भी पाते।
हो कर लो जिनवर…

– ४ –

सम्यक्दर्शन हो जाता है, मित्थ्यातम मिट जाता – २
रत्नत्रय की दिव्य शक्ति से, कर्म नाश हो जाता।
हो कर लो जिनवर…

– ५ –

निज स्वरुप का दर्शन होता, निज की महिमा आती – २
निज स्वभाव साधन के द्वारा, स्वागती तुरत मिल जाती ।
हो कर लो जिनवर…

इस पेज को शेयर करे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *