मनहर तेरी मूरतिया, मस्त हुआ मन मेरा | Manhar teri muratiya, mast hua man mera

तर्ज:

मनहर तेरी मूरतिया,
मस्त हुआ मन मेरा, मस्त हुआ मन मेरा
तेरा दर्श पाया पाया, तेरा दर्श पाया।
मनहर तेरी मूरतिया…

– १ –

प्यारा प्यारा सिंहासन, अति भा रहा, भा रहा,
उस पर रूप अनूप तुम्हारा, छ रहा, छा रहा।
पद्मासन अति सोहे रे – २, नयना उमगे है मेरे,
चिट्टा ललचाया पाया, तेरा दर्श पाया।
मनहर तेरी मूरतिया…

– २ –

तव भक्ति से भव के दुःख मिट जाते है, जाते है,
पापी तक भी भव सागर तीर जाते है, तीर जाते है।
शिव पद वह ही पाए रे – २, शरणा आगत में तेरी,
जो जीव आया पाया, तेरा दर्श पाया।
मनहर तेरी मूरतिया…

– ३ –

साँच कहु कोई निधि मुझको मिल गयी, मिल गयी,
जिसको पाकर मन की कालिया खिल गयी, खिल गयी।
आशा पूरी होगी रे – २, आस लगा के व्रद्धि,
तेरे द्वार आया पाया, तेरा दर्श पाया।
मनहर तेरी मूरतिया…

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