मीठे रस से भरी जिनवाणी लागे | Meethe ras se bhari jinwani laage

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मीठे रस से भरी जिनवाणी लागे, जिनवाणी लागे।
म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे।

मीठे रस से भरी जिनवाणी लागे, जिनवाणी लागे।
म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे।

– १ –

आत्मा है उजरो उजरो, तन लागे म्हने कालो – २
शुद्ध आत्म की बात, अपने मन में बसा लो – २
म्हने चेतना की बात – २, घणी प्यारी लागे, मनहारी लागे।
म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे।
मीठे रस से भरी…

– २ –

देह अचेतन, मैं हु चेतन, जिनवाणी बतलाये – २
जिनवाणी है सच्ची माता, सच्चा मार्ग दिखाए – २
अरे मान ले तू चेतन – २, भैया कई लागे, थारो काई लागे।
म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे।
मीठे रस से भरी…

– ३ –

नहीं भावे म्हाने लाडू पेड़ा, नाही भावे काजू – २
मोक्ष पूरी में जाऊंगा मैं बन के दिगंबर साधू – २
म्हाने मोक्ष महल को – २, मार्ग प्यारो लागे, घणो प्यारो लागे।
म्हने आत्मा की बात घणी प्यारी लागे।
मीठे रस से भरी…

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